मानव उत्थान

आज हम मानव उत्थान पर बात करेंगे 


पूर्ण परमात्मा कबीर जी द्वारा रचित सृष्टि में मनुष्य का श्रेष्ठ स्थान है प्रत्येक प्राणी अपने जीवन में अति श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करना चाहता है औरों से हटकर जीवन जीना चाहता हैं एक आलीशान जीवन जिसके लिए वह कठिन परिश्रम करके धन इकठ्ठा करता है जिसके लिए वह हर रास्ते से गुजर जाता हैं किसी व्यक्ति के साथ छल कपट करना झूठे वादे करना विश्वास घात करना आदि आदि यहि मुख्य कारण है कि मानव उत्थान सही दिशा में नहीं हो रहा हैं 

जबकि मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य है कि सत भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करना

आज वर्तमान में मानव उत्थान पर कई धार्मिक संस्थाएं काम कर रही हैं लेकिन वह भी इस मार्ग से अपरिचित व इस कार्य में असफल रहे हैं 
क्योंकि यह कार्य सिर्फ पूर्ण परमात्मा कर सकते हैं या फिर उनके द्वारा भेजे गए हंस द्वारा हो सकता हैं जो यहां पृथ्वी लोक आकर एक तत्वदर्शी संत की भूमिका निभाते हैं जिसके बारे में गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 स्पष्ट किया गया है और वर्तमान में वो तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं जो इस कार्य को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं 
उनका एक ही नारा है 

जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा



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