श्री कृष्ण जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व 


भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है, त्योहार है। भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस का संहार करने के लिए मथुरा के कारागार में मध्यरात्रि को जन्म लिया था।

 ... इसलिए प्रतिवर्ष ठीक इसी घड़ी में भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। अब भोले श्रृद्धालु इसी तरह
हर वर्ष श्री कृष्ण जी का जन्म दिवस मनाने लगे इस दिन विशेष पूजा पाठ करना व्रत करना आदि आदि लेकिन सच्चाई यह है कि श्री कृष्ण जी पूर्ण परमात्मा नहीं है यह सिर्फ तीन लोक के भगवान है 

यह हमारे कर्मों में कुछ परिवर्तन नहीं कर सकते अर्थार्त हमें सिर्फ वर्क डन ही दे सकते हैं यह सिर्फ नियमित कार्य ही करते हैं जिसका प्रमाण शिव पुराण में मिलता हैं श्री कृष्ण जी की भक्ति से मोक्ष संभव नहीं है क्योंकि गीता ज्ञान दाता अपनी स्वयं की भक्ति को अनुत्तम बता रहा है गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में 

फिर कौन है वह अविनाशी परमात्मा जिसकी शरण में जाने को कह रहा है 
पूर्ण परमात्मा कबीर जी की शब्द शक्ति से असंख्य ब्रह्मांड चल रहे हैं

 श्री कृष्ण जी ने तो एक गोवर्धन पर्वत ही उठाया था सिर्फ इसी लीला से उन्हें पूर्ण परमात्मा नहीं कह सकते 
कृष्ण जी की भक्ति से बेकुंठ लोक जायेंगे वहां से पुन्य समाप्त होते ही वापिस लख चौरासी में आना पड़ेगा जबकि पूर्ण परमात्मा की भक्ति करके सतलोक जा सकते हैं जहां जाने के बाद जन्म मृत्यु समाप्त हो जाती है

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